रविवार, 2 जनवरी 2022

रूढ़िवाद: जब मां-बाप ही बन जाते हैं लड़कियों के लिए मुसीबत

 

रूढ़िवाद: जब मां-बाप ही बन जाते हैं लड़कियों के लिए मुसीबत


कहते हैं हर मां-बाप अपने बच्चों को बेहद प्यार करते हैं, वे बच्चों के लिए कभी बुरा नहीं चाहते। लेकिन हकीकत ये है कि रूढ़िवादी मां-बाप अपने बच्चों से कहीं ज्य़ादा प्यार और परवाह समाज के मूर्ख यानी रूढ़िवादी, दकियानूसी समाज को करते हैं। ऐसे मां-बाप बच्चों के लिए मुसीबत तो खड़ी करते ही है इसके अलावा वे देश को भी गर्त में ले जाने का काम करते हैं। यहां हम मां-बाप के एक दकियानूसी काम का खुलासा कर रहे हैं.. 


जी हां, माँ-बाप गैरकानूनी काम करके लड़कियों की जिंदगी नर्क बना देते हैं . दहेज गैरकानूनी है लेकिन गर्व से देते हैं, लेकिन जो संपत्ति का हक कानूनी है वो नहीं देते. दहेज को कहते हैं ये बिटिया के लिए ही तो होता है पर नगदी रखते हैं दामाद के हाथ पर. बिटिया के हाथ पर क्यों नहीं रख देते अगर दहेज बिटिया का होता है. 



बेटों की तरह बेटियों का भी संपत्ति में अधिकार होता है। लेकिन कहा जाता है, ससुराल का घर ही उसका घर होता है, ससुराल की संपत्ति में लड़कियों का अधिकार होता है. खाक अधिकार मिलता है. ससुराल में सास-ससुर की संपत्ति में कोई हिस्सा बहू के नाम नहीं होता. बस उनके घर में गुजर-बसर करने का हक मिलता है. 

कौन-सी लड़की उस घर में रहना चाहेगी जहाँ रोज-रोज लड़ाई-झगड़ा होता है. जहाँ रोज उस पर ताने मारे जाते हैं. जिस घर में शांति नाम चीज नहीं. अगर घर के सदस्य दरिंदे टाइप के हों उस घर में ऐसे लोगों के बीच कौन-सी लड़की रहना चाहेगी..? पर मजबूरी में उसे रहना पड़ता है क्योंकि उसके पास और कोई चारा नहीं. न तो अच्छी एजुकेशन, न ही कोई अच्छी जॉब. जिन लड़कियों के पास कोई कमाई का जरिया नहीं वो कहां जाएं.. 


तलाक भी ले लेंगी तो मेंटिनेंस कैसे और कितना मिलता है वो सब जानते हैं. भिखारियों की तरह जीवन गुजारना पड़ता है अगर उसके पास अच्छी शिक्षा और जॉब नहीं. अनपढ़ ब्याह दी जाने वाली लड़कियां तो तलाक लेने की भी नहीं सोच सकतीं, उन्हें तो ससुराल में ही घुट-घुट कर जीने को मजबूर किया जाता है. 

बेटियों के लिए अच्छा होता अगर माँ- बाप शादी में बाहरी लोगों को दिखाने और खिलाने में लाखों खर्च करने के बजाय उस पैसे को बेटी के बैंक अकाउंट में डालते, नगदी दामाद के हाथ में न देकर बेटी को देते. अब कुछ लोग कहेंगे बेटियों का स्त्रीधन यानी ससुराल और रिश्तेदारों से मिले उपहारों पर पूरा हक होता है. 



वो ये बताएं इतने जरा से स्त्रीधन से वो जिंदगी काट लेगी क्या? और अधिकतर ससुराल वाले तो बहू के स्त्रीधन को बहू को न देकर खुद के पास ही रखते हैं. जिसे निकलवाने के लिए लड़की को वकीलों के चक्कर तक काटने पड़ते हैं..  लड़कियों की इस हालत के सबसे बड़े जिम्मेदार और कोई नहीं, उनके मां-बाप ही होते हैं. 

ऐसे माँ- बाप को मेरी सलाह- 

ऐसे माँ- बाप को मेरी यही सलाह है कि, वे बेटियां या तो पैदा ही न करें या तो बेटियों को उच्च शिक्षा हासिल कराएं और तब तक उन्हें शादी करने पर मजबूर न करें जब तक वो अच्छी नौकरी या अपना कोई बिजनेस न करने लगे. लड़कियों को आर्थिक रूप से मज़बूत होने के बाद ही शादी करनी चाहिए और माँ-बाप बेटियों को शादी करने के लिए भी मजबूर न करें. शादी न करने पर भी उसे घर में रहने की जगह दें, अगर लड़की उस घर में न रहकर, बाहर किसी दूसरे शहर में रहना चाहे तो उसे संपत्ति में उसका हिस्सा पैसे या किसी अन्य रुप में दें..


-शशि अपराजिता

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