जब कोई लड़की अपने घरवालों के खिलाफ जाकर अपनी मर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी कर लेती है तो सब उस बुरा बोलते हैं और कहते हैं उसने घर की इज्जत मिट्टी में मिला दी पर कोई भी ये जानने की कोशिश नहीं करता कि आखिर उसे ये कदम क्यों उठाना पड़ा। कोई भी लड़की इस तरह से भागकर शादी नहीं करना चाहती। न ही कभी चाहती कि, उसके परिवार का सिर झुके।
जब उसके लिए सारे रास्ते बंद हो जाते हैं आगे कैरियर भी नहीं बनाने दिया जाता और उसके साथ हर जगह भेदभाव किया जाता है, तभी मजबूरी में कोई ये कदम उठाता है। हालांकि जो कम उम्र की लड़कियां ये कदम उठाती हैं बिना सोचे समझे वो गलत है।
अगर घर वाले लड़की का साथ दें उसकी पसंद के लड़के और कानूनी फैसले को एक्सेप्ट कर लें तो कोई लड़की घर वालों के खिलाफ न जाए कभी।
ये समाज का कड़वा सच है पर हमारा कथित सभ्य समाज इसे कभी स्वीकार नहीं करना चाहता। जिस दिन समाज घर और पिता की इज्जत को लड़की के नाजुक कंधों पर लादना बंद कर देगा उस दिन से उनकी इज्जत कभी लुटेगी ही नहीं ।
जब उसके लिए सारे रास्ते बंद हो जाते हैं आगे कैरियर भी नहीं बनाने दिया जाता और उसके साथ हर जगह भेदभाव किया जाता है, तभी मजबूरी में कोई ये कदम उठाता है। हालांकि जो कम उम्र की लड़कियां ये कदम उठाती हैं बिना सोचे समझे वो गलत है।
अगर घर वाले लड़की का साथ दें उसकी पसंद के लड़के और कानूनी फैसले को एक्सेप्ट कर लें तो कोई लड़की घर वालों के खिलाफ न जाए कभी।
ये समाज का कड़वा सच है पर हमारा कथित सभ्य समाज इसे कभी स्वीकार नहीं करना चाहता। जिस दिन समाज घर और पिता की इज्जत को लड़की के नाजुक कंधों पर लादना बंद कर देगा उस दिन से उनकी इज्जत कभी लुटेगी ही नहीं ।

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