बेटी सरेआम बोल दे कि बाप ने मेरे पीछे गुंडे भेजे तो इज्जत चली जाती है. बाप-भाई बेटी को अपने ही घर के आंगन में गाड़कर उस पर तुलसी उगाएं तो नहीं जाती इज्जत, लड़की अपनी जिंदगी का एक फैसला खुद ले ले तो इज्जत चली जाती है.
मां-बाप का खोजा पति मारे-कूटे, जला दे, सातवीं मंजिल से फेंक दे तो नहीं जाती इज्जत, लड़की अपनी मर्जी का लड़का खोज ले तो इज्जत चली जाती है.
वाह रे मां-बाप की इज्जत !
अब बहुत हो गया आपकी इस झूठी इज्जत के नाम पर बेटियों की बलि देना .
बंद करिए अपनी इस झूठी इज्जत के लिए बेटियों की खुशियों का गला घोंटना.
बंद करिए बेटियों को अपनी जागीर समझना.
बंद करिए बेटियों के कंधों पर इस नासमझ इज्जत का बोझ लादना.
बंद करिए बेटियों को परिवार की इज्जत का नाम देना.


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