बुधवार, 24 मार्च 2021

आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अलावा सशक्त बने महिलाएं




पढ़-लिखकर अफसर बन जाने या अच्छी सैलरी वाली नौकरी करने से कोई महिला आर्थिक रूप से तो आत्मनिर्भर बन सकती है, लेकिन अगर वह अपनी जिंदगी से जुड़े सभी छोटे-बड़े फैसले ( जैसे- क्या पहनना है, क्या करना है, कब सोना है, कब जागना है, क्या लिखना है, किससे बात करनी है, किससे नहीं करनी आदि) लेने में आत्मनिर्भर नहीं है तो उसे कतई सशक्त महिला नहीं कहा जा सकता । अगर वह अपने साथ या अन्य महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव या अन्याय का विरोध करना नहीं जानती या करना ही नहीं चाहती तो उसे कतई सशक्त महिला नहीं कहा जा सकता। 

आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिला भी अगर रूढ़ीवादी सोच रखती है , अंधविश्वास को आस्था का नाम पर ढो रही है तो भी उसे सशक्त महिला कतई नहीं कहा जा सकता न ही वह महिला कभी भी महिलावादी (महिलाओं के हक के लिए बात करने वाली) हो सकती है। 

अक्सर देखने को मिलता है कि समाज  #लैंगिक_असमानता और #रूढ़िवादी सोच का विरोध करने वाली महिलाओं को गलत बताते हुए उच्च पद पर कार्यरत उपरोक्त तरह की महिलाओं के गुणों का बखान करते हुए उदाहरण देते हैं। जो उनकी नासमझी ही दर्शाती है। 

आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना बहुत अच्छी बात है, हर महिला को होना चाहिये, लेकिन साथ ही वे सशक्त भी बने तो समाज में महिलाओं का संघर्ष काफी हद तक कम हो सकता है। कम से कम समाज उन्हें आपका उदाहरण देकर हतोत्साहित तो नहीं कर सकेगा..

✍️ शशि

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